२०२० में मैं सतलज टावर मे रहने आया. बाईंपुर मोड़ से अंदर आते हुए मैंने ठान लिया था की ये जगह रहने लायक नहीं है. पर जैसे ही गणपति स्मार्ट सिटी में प्रवेश किया, लगा, सही जगह है रह सकते हैं.

सो रहने लगे

एक चटाई, एक बिछोना, कुछ बर्तन, एक टूटा टाटा पंखा, यही सब सामान था. हाँ एक  टीवीएस स्पोर्ट्स बाइक भी है. नौकरी भी इसी बिल्डर के यहाँ थी. तो मन में एहसास ठीक सा था.

खैर लोगों से मिलना जुलना चालू हुआ. जैसे होता है सब जगह. 

सतलज के लोग हैं. अब जैसा अफोर्डेबल टू बीएचके है उस हिसाब से ठीक हैं.

एक दिन पता चला किसी दूसरी टावर नर्मदा ००५ से सतलज वालों की कुछ बहस हो गयी. किसी ने कहा था की बड़ा पार्क सिर्फ नर्मदा टावर वालों के लिए है. हो भी सकता है या नहीं भी. पर ये चुतियापा जिसने किया था , कर्रा वाला था. सो हमने सुटलजे वालों से बातचीत में कह दिया। पार्क सबका होता है. अब क्यूंकि हमारी टोन नार्मल और सॉफ्ट थी तो कोई दिक्कत नहीं।

पर एक समस्या है सतलज टावर में यहाँ इंटरनेट नाम की आवश्यक चीज़ काफी काम मात्रा में है.

तो थोड़े प्रयास के बाद हम नर्मदा में शिफ्ट हो गए

यहाँ ये इंटरनेट बस थोड़ा सा ही ज्यादा था. 

चलो काम चलाएंगे

सतलज के लोग अच्छे हैं – नर्मदा में आकर और भी अच्छा लगा

काफी हसमुख और मिलनसार लोग हैं

खूब मस्ती और जबरदस्ती की पार्टियां

ऐसे ही चलता रहा 

फिर पता नहीं किसी की नजर लग गयी

यहाँ कुछ थोड़े लोगों के दो गुट बन गए ,,, एक गुट में ज्यादातर वही लोग जो पहले थे. दुसरे गट में कुल ३ लोग.

कोण सही कोण गलत – इस से कोई मतलब नहीं

बड़े गुट  ने छोटे नए गुट को अपना दुश्मन मान लिया – ऐसा मुझे प्रतीत हुआ. उन्हें भी कुछ ऐसा ही प्रतीत हुआ होगा, तभी उन्होंने दुश्मन माना।

कहना सुन्ना कोई ख़ास नहीं

उनका अपने किसी कोने में पता नहीं क्या बात करना और इस गुट का किसी और कोने में बात करना

छोटे गुट में में भी हूँ , में एक किरायेदार हूँ. बड़े गुट में ज्यादातर मकान मालिक हैं. मुझे ऐसा एहसास हुआ की जो कल तक खुद किराये पर रहते थे आज ऐसे किरायेदार को नीच भवन से देख रहे थे जिसके बारे वो कुछ नहीं जानते

खैर ऐसा करने वाले बड़े गुट में दो चार ही थे

बड़ा गुट वैसे तो बहुत सही बनने की कोशिश करता है पर कोई न कोई बड़ी बेवकूफी वाली गलती करता है और मुँह की  है कई बार इसी कारन से

छोटा गुट अक्खड़ है पर अभी तक मुँह की नहीं खायी

बड़े गुट में छोटे गुट के प्रति इतना जहर है की छोटे गुट से एक सज्जन ने छोटा सा चायपानी का कार्य क्रम रखा जिसमे सभी को हाँ बड़े गुट से भी सभी को , आमंत्रित किया। पर बड़े गुट से सबने क्या सलाह की कोई नहीं आया.

यहाँ मुझे बड़े गुट की बात खल गयी. ये दिखाता है कि बड़ा गुट सिर्फ संख्या में बड़ा है सोच में बहुत छोटा। छोटी सोच का परिचय दिया।

इस घटना ने माहौल को ख़राब कर दिया है

खैर सबकी अपनी सोच अपना नजरिया है

ये मेरी कहानी है जो मैने आभास किया – सबकी कहानी और सच्चाई अलग अलग होती है

पर अब एकता वेक्ता न होने की

असल में मेरा मन अभी बहुत खिन्न है

सुनील चौधरी 

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  1. Ankit Jain

    अगर ये एक कहानी होती तो शायद मैं ज़्यादा ध्यान नही देता मगर ये वो कहानी है जो आप बीती है। ये सिर्फ एक छोटा सा प्रयास किया गया था सबको एक साथ इखट्टा करने का जिसमें सफलता नही मिल पाई। अब शायद आगे से प्रयास भी ना हो सकेगा।

    1. Sunil Chaudhary Listing Owner

      प्रयास और लगातार प्रयास आवश्यक है. परन्तु अगले प्रयास में पिछले अनुभव, रणनीति इत्यादि को भी शामिल करें।
      रहीमन धागा प्रेम का
      मत तोड़ो चटकाए
      तोड़े ते फिर ना जुड़े
      जुड़े गाँठ पड़ जाए